क्या आपको प्री-डायबिटीज है या नहीं? जानिए संकेत !
प्री-डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक होने लगता है, लेकिन अभी वह डायबिटीज की सीमा तक नहीं पहुँचा होता। अक्सर इसमें कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए कई लोगों को पता ही नहीं चलता कि उनका ब्लड शुगर बढ़ रहा है।
अगर समय रहते प्री-डायबिटीज की पहचान कर ली जाए और खान-पान, शारीरिक गतिविधि तथा जीवनशैली में सही बदलाव किए जाएँ, तो टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
कैसे पता करें कि आपको प्री-डायबिटीज है?
सिर्फ लक्षणों के आधार पर प्री-डायबिटीज की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए ब्लड शुगर की जाँच जरूरी होती है।
1. फास्टिंग ब्लड शुगर (FBS)
कम से कम 8 घंटे खाली पेट की गई जाँच में:
100–125 mg/dL का स्तर प्री-डायबिटीज की श्रेणी में माना जाता है।
2. HbA1c टेस्ट
यह टेस्ट पिछले लगभग 2–3 महीनों के औसत ब्लड शुगर का अंदाजा देता है।
5.7%–6.4% का HbA1c प्री-डायबिटीज की श्रेणी में आता है।
3. ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (OGTT)
75 ग्राम ग्लूकोज लेने के 2 घंटे बाद:
140–199 mg/dL का ब्लड शुगर प्री-डायबिटीज की श्रेणी में माना जाता है।
प्री-डायबिटीज में कौन-से संकेत दिखाई दे सकते हैं?
प्री-डायबिटीज में अक्सर कोई खास लक्षण नहीं होते। कुछ लोगों में ब्लड शुगर बढ़ने के कारण:
• बार-बार प्यास लगना
• बार-बार पेशाब आना
• थकान या कमजोरी महसूस होना
• धुंधला दिखाई देना
• घाव भरने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगना
जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, इन लक्षणों का होना प्री-डायबिटीज की पुष्टि नहीं करता। सही जानकारी के लिए ब्लड शुगर की जाँच सबसे महत्वपूर्ण है।
किन लोगों में प्री-डायबिटीज का खतरा अधिक हो सकता है?
प्री-डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है यदि:
• वजन अधिक हो या पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी हो
• शारीरिक गतिविधि बहुत कम हो
• परिवार में टाइप-2 डायबिटीज का इतिहास हो
• खान-पान में मीठे और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की मात्रा अधिक हो
• पहले गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज हुई हो
• उम्र बढ़ने के साथ अन्य जोखिम कारक भी मौजूद हों
अगर प्री-डायबिटीज है तो क्या करें?
प्री-डायबिटीज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार:
संतुलित आहार अपनाएँ – सब्जियाँ, दालें, साबुत अनाज, प्रोटीन और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करें और अतिरिक्त चीनी व अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को सीमित करें।
नियमित शारीरिक गतिविधि करें – रोजाना चलना और नियमित व्यायाम ब्लड शुगर नियंत्रण में मदद कर सकता है।
वजन को स्वस्थ सीमा में रखने पर ध्यान दें – यदि वजन अधिक है, तो विशेषज्ञ की सलाह से धीरे-धीरे वजन कम करना फायदेमंद हो सकता है।
नियमित जाँच कराएँ – डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड शुगर और HbA1c की निगरानी करें।
एक जरूरी बात
प्री-डायबिटीज का मतलब यह नहीं है कि आपको निश्चित रूप से डायबिटीज हो जाएगी। समय पर पहचान, स्वस्थ खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और जीवनशैली में सही बदलाव से टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
अगर आपको लगता है कि आपका ब्लड शुगर बढ़ सकता है, तो केवल इंटरनेट पर बताए गए लक्षणों के आधार पर निष्कर्ष न निकालें। ब्लड शुगर की उचित जाँच करवाएँ और रिपोर्ट को डॉक्टर/स्वास्थ्य विशेषज्ञ से समझें।
Divya Arogya Sansthan का उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और सही समय पर सही जानकारी लेने के लिए प्रेरित करना है।







